Tibetan Buddhism
पातिमोक्खसुत्त (भिक्खुपातिमोक्ख) हिंदी अनुवाद सहित ,The Pātimokkhasutta (Bhikkhupātimokkha) with Hindi translation
The Tibetan Book of The Great Liberation
The life of Milarepa
सुत्तपिटके खुद्दकनिकाये बुद्धवंसपालि (हिंदी अनुवादसहित ), The Buddhavansapali (Khuddakanikayapali) with Hindi Translation
स्वयं भगवान गौतम बुद्ध के मुखारविन्द से प्रथम बुद्ध से प्रारंभ कर अट्ठाइसवें बुद्ध तक के सभी २८ अवतारों का वर्णन पालि परम्परा के अनुसार से हुआ है। इसमें सभी बुद्धावतारों के परिचय के साथ उनका अवतारकाल, आयु ,जन्म ,जाति ,जन्म-स्थान ,माता, पिता, विवाह ,गृहाभिनिस्क्रमण, दुष्करचर्या, बोधिवृक्ष , बुद्वत्वप्राप्ति, धर्मचक्रप्रवर्तन, अग्रश्रावक,अग्रश्राविका,उपस्थापक, अग्रउपासक,अग्रउपासिका,अभिसमय,सन्तसमागम एवं उनका निर्वाणकाल भी वर्णित है।
सुत्तपिटके खुद्दकनिकाये धम्मपदपालि (हिन्दी-संस्कृत अनुवाद सहित) , The Dhammapadapali with Hindi & Sanskrit Translation.
गुह्यसमाजतन्त्रम तथागतगुह्यकम (हिन्दी अनुवाद सहित ), GuhyaSamajTantra or Tathagataguhyaka
तत्कालीन बौद्ध धर्मानुयायी मूल बौद्ध धर्म से संतुष्ट नहीं थे। वे बुद्धत्वप्राप्ति की एक ऐसी सरलतम चामत्कारिक निश्चित प्रक्रिया चाहते थे जिसके द्वारा इसी जीवन में या उससे भी पूर्व ही निर्वाण प्राप्त किया जा सके। गुह्यसमाज ग्रन्थ ने उनकी इस आकांक्षा को पूर्णतः संतुष्ट किया. इसी कारण यहाँ ग्रन्थ, अत्यधिक लोकप्रिय हुआ।
महायानसूत्रालङ्कार: (आर्यमैत्रेयविरचितःअनेकविधसूची-पाठान्तरादिसंवलितः विज्ञानवादस्य प्रमुखो ग्रन्थः),Mahayanasutralankar by Aryamaitreya & Asanga
सुत्तपिटके खुद्दकनिकाये सुत्तनिपातपालि (हिन्दी-अनुवाद सहित ), The Suttanipatapali (khuddakanikayapali) with Hindi Translation.
बौद्धधर्म की परम्परा में सुत्तनिपातपालि उतना ही लोकप्रिय माना गया है जितना धम्मपदपालि ; मौलिक बौद्ध धर्म एवं बौद्ध साहित्य की दृष्टि से इस ग्रन्थरत्न का बुद्धकाल से ही उच्चतम स्थान माना जाता है।
सम्राट अशोक ने अपने भब्रुशिला लेख (बैराठ,जयपुर,राजस्थान ) में बुद्धोपदिष्ट जिन महत्वशाली सात सूत्रों का भिक्षुओं के लिये अनिवार्यरूप से प्रतिदिन स्वाध्याय घोषित किया है उन में से तीन प्रमुख सूत्र सुत्तनिपात ग्रन्थ से ही लिये गये हैं।
सुत्तपिटके खुद्दनिकाये विमानवत्थुपालि, पेतवत्थुपालि (हिन्दी अनुवादसहित) , The Vimanavatthupali Petavathupali (Khuddakanikayapali) with hindi Translation
सुत्तपिटके खुद्दनिकाये खुद्दकपाठपालि, उदानपालि, इतिवुत्तकपालि, चरियापिटकपालि (हिन्दी अनुवाद सहित ), The KhuddakaPatha, Udana, Itivuttaka & Cariyapitaka (KhuddakaNikayaPali) with Hindi Translation.
पालि के सर्वोत्तम काव्य-उद्धार खुद्दकनिकाय के ग्रंथों में सन्निहित है। और उनका प्रणयन मानवीय तत्वों के आधार पर चार निकायों के बाद हुआ है। उनमें से अनेक अत्यन्त प्रचीनयुग के भी है।
खुद्दकनिकाय का अधिकांश स्वरूप काव्यात्मक होते हुए भी उसकी मूल भावना सर्वांश में बौद्ध है। अपितु उसकी गाथाओं में अनेक तो पिटक -संकलन के प्राचीनतम युग के सूचक भी हैं।
सुत्तपिटके खुद्दकनिकाये थेरगाथापालि, थेरीगाथापालि (हिन्दी-अनुवादसहित ) The Theragathapali Therigathapali (Khuddakanikayapali) with Hindi Translation
थेरगाथा एवं थेरीगाथा -दोनों ही ग्रंथ, खुद्दकनिकाय में परिगणित १५ ग्रंथों में अतिशय महत्वपूर्ण है।आचार्य बुद्धघोष ने इन दोनों ग्रथों का खुद्दकनिकाय ग्रन्थसमूह में अष्ठम एवं नवम स्थान निर्धारित किया है। इन दोनों ग्रंथों में क्रमशः बुद्धकाल के भिक्षुओं तथा भिक्षुणियों के पद्य बद्ध जीवन-संस्मरण है। काव्यसाहित्य एवं दर्शन के दृष्टि से इन दोनों ग्रंथों का स्थान धम्मपद एवं सुत्तनिपात के बाद ही है।