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मारणपात्र

600

योग तंत्र के गूढ़ गोपनीय एवं रहस्यमय आध्यात्मिक विषयों के मर्मज्ञ, प्रच्छन्न अप्रच्छन्न, सिद्ध, साधक योगी, संत, महात्माओं के सत्संग का परिणाम।

मिलिन्दपञ्हपालि Milindapanha Pali ( Qustions of Milinda )

1,200

मिलिन्दपञ्हपालि में, पालि साहित्य के पालि -त्रिपिटक से नाना ग्रंथों के नाम देकर पाँच निकायों,  अभिधम्मपिटक के सात ग्रंथों और उनके भिन्न-भिन्न अंगों के निर्देशपूर्वक अनेक अंश उद्धृत किये गये हैं

मीमांसातर्कभाषा

395

This book, Mimamsatarkabhasa, is a great leap in the advancement of Mimamsa. Along with Mimamsanaya-bhusanam, and Mimamsapadarthavijnanam, the trio of Mimamsa books composed by Prof. Nyaupane is undeniably the greatest work in Mimamsa this century has seen. He has previously composed and or translatd more than 30 books, such as, Kalachakratantram, Guhyasamajatantram, Hevajra-tantram, Lahidi Kriyayog Samhita, Bauddhadarsanabhumi, Bauddhapramanasastram, Tarinivarivasya, Darsanasandoha and so on.

मुद्राराक्षसं

Mudrarakshasam by Mahakavi Vishakhdutt. Edited with commentary by Dr. Ramashankar Tripathi.

मृत्यु की दस्तक

300

जीवात्मा के लिए सबसे बारे सत्य है मृत्यु. जीवन में केवल मृत्यु ही अवश्यम्भावी है क्योंकि यही एक स्थिति है जो जोगी और भोगी, राजा और रैंक, शाशक और शाषित - किसी भी वर्ग में भेदभाव नहीं रखती. अलग-अलग धर्मों और दर्शनों ने अपने ही दृष्टिकोण से इसकी व्याख्या की है.

मेरा ईश्वर लाभ

295

यह एक परमार्थ की उपलब्ध चैतन्ययोगी की आत्मकथा है. जिसने अपने जीवन को चैतन्य की प्राप्ति हेतु उत्सर्ग कर दिया.

योगिनीहृदयम

295

योगिनीह्रदयम भगवती त्रिपुरसुन्दरी की अंतर वरिवस्या का प्रतिपादक ग्रन्थ है. इसमें तीन पटल हैं: चक्रसंकेत, मन्त्रसङ्केत और पूजासंकेत. प्रथम पटल में भगवती के अवतार-स्थान श्रीचक्र का आध्यात्मिक स्वरुप प्रदर्शित किया गया है की किस प्रकार विसटीर्ना तत्त्व विश्वमय बन जाता है. शक्ति के अम्बिकादि तथा शान्तादि चार प्रकारों, वाणी के पारा आदि चार भेड़ों, चार पीठों, चार लिंगों, संख्या-सम्मत २५ तत्त्वों तथा समस्त

रहस्य

300

सत्य घटनाओं पर आधारित अविश्वसनीय रहस्य कथाएँ।