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काशी रहस्यम (हिंदी अनुवाद सहित) एवं सूक्ति रत्नावली हिंदी व्याख्या सहित
स्कन्द पुराणीय 'काशीखण्ड ' इस ग्रन्थ से जैसे कशी स्थित विभिन्न तीर्थों, देवालयों, वापी, कूप अदि के भूगोल एवं इतिहास इन दोनों के ज्ञान के साथ उनके आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व का परिचय प्राप्त होता है वैसे ही 'काशी रहस्य' के अनुशीलन से कशी से सम्बंधित गूढ़ तत्त्वों रहस्यों का ज्ञान होता है. काशीरहस्य यह प्राचीन ब्रह्मवैवर्त का तृतीय खंड है ऐसा उसकी अध्याय के अंत में दी गयी पुष्पिका से ज्ञात होता है.
काश्मीर शिवाद्वयवाद की मूल अवधारणाएं
आगमिक संस्कृति के सारभूत काश्मीर शिवाद्वयवादी जीवन-दर्शन के प्रति विद्यानों की अनुदिन बढ़ती हुई प्रवृत्ति के बावजूद इस सम्प्रदाय की दार्शनिक, पद्यात्मक/अवधानात्मक और अनुष्ठानात्मक संरचना पर अब तक जो काम हुआ है वह बहुमूल्य होने पर भी अत्यल्प है. इस सन्दर्भा में गंभीर गवेषणा को आगे बढ़ाने के क्रम में यह ग्रन्थ एक प्रारंभिक प्रयास है जिसमें कश्मीर शिवाद्वयवाद के मौलिक चिंतनक्रम में अनुस्यूत आधारभूत विशिष्टा प्रत्ययों को रूपायित कर उनके उन्मीलन से इस सम्प्रदाय में एक अंतर्दृष्टि विक्सित करने की चेष्टा की गयी है.
कौन हैं ये श्यामाचरण Kaun Hain Ye Shayamacharan
गुह्यसमाजतन्त्रम तथागतगुह्यकम (हिन्दी अनुवाद सहित ), GuhyaSamajTantra or Tathagataguhyaka
तत्कालीन बौद्ध धर्मानुयायी मूल बौद्ध धर्म से संतुष्ट नहीं थे। वे बुद्धत्वप्राप्ति की एक ऐसी सरलतम चामत्कारिक निश्चित प्रक्रिया चाहते थे जिसके द्वारा इसी जीवन में या उससे भी पूर्व ही निर्वाण प्राप्त किया जा सके। गुह्यसमाज ग्रन्थ ने उनकी इस आकांक्षा को पूर्णतः संतुष्ट किया. इसी कारण यहाँ ग्रन्थ, अत्यधिक लोकप्रिय हुआ।