Showing 13–24 of 67 resultsSorted by popularity

सुत्तपिटके अंगुत्तरनिकायपालि – ४. खण्डों में,(१. एकक-दुक-तिकनिपात २.चतुक्क -पंचकनिपात ३.षट्क-सप्तक-अष्टकनिपात ४. नवक-दशक-एकादशक निपात ) हिन्दी अनुवादसहित।,Anguttaranikayapali 4 vols. with Hidi Translation. (Copy)

₹4,200

इस ग्रन्थ में भगवान् बुद्ध ने भिक्षुओं तथा जिज्ञासुओं को धर्म सम्बन्धी नियमों और आचारों का व्याख्यान आकर्षक शैली में किया है। इसमें गृहस्थों तथा श्रमणों के लिए पृथक पृथक अचार-नियमों का भी प्रतिपादन हुआ है।

सुत्तपिटके दीघनिकायपालि – ३ खण्डों में (१. सीलक्खन्धवग्गो २.महावग्गो ३.पाथिकवग्गो ) हिन्दी अनुवादसहित। The Dighanikayapali – in 3 volumes (1. Silakkhandha Vagga 2. Maha Vagga 3. Pathika Vagga) with Hindi translation.

₹2,500

दीघनिकाय ग्रन्थ में बुद्धाभिमत दर्शन के साथ यथाप्रसङ्ग तत्कालीन इतिहास, भूगोल,राजनीति एवं सामाजिक व्यवस्था भी भगवान बुद्ध के प्रवचनों में ओतप्रोत है।

पालिव्याकरण (बालावतार) (हिन्दी अनुवाद सहित ), Pali Grammar (Balavatara) of Bhikkhu Dharmakitti with Hindi Translation

₹350

पालि में लिखे गये जितने भी व्याकरण ग्रन्थ हैं, वे तीन परम्पराओं में विभक्त हैं। ये परम्पराएँ पालि-व्याकरणों के पठन-पाठन की अपनी परम्पराएँ हैं। ये परम्पराएँ हैं : १. कच्चान, २. मोग्गल्लान और ३.सद्द्नीति।
इसी कच्चान परंपरा के अन्तर्गत "बालावतार" है। "बालावतार" प्रारम्भिक पाठकों के लिए बहुत ही उपयोगी और महत्वपूर्ण ग्रन्थ है।

महायानसूत्रालङ्कार: (आर्यमैत्रेयविरचितःअनेकविधसूची-पाठान्तरादिसंवलितः विज्ञानवादस्य प्रमुखो ग्रन्थः),Mahayanasutralankar by Aryamaitreya & Asanga

₹600

' महायानसूत्रालङ्कार ' विज्ञानवाद का सबसे प्रधान ग्रन्थ है। ' महायानसूत्रालङ्कार ' गुरु मैत्रयनाथ एवम उनके शिष्य आर्य असङ्गकी सम्मिलित कृति है। मूलभाग मैत्रेयनाथ का और टीकाभाग आर्य असङ्ग का कहा जाता है।

पातिमोक्खसुत्त (भिक्खुपातिमोक्ख) हिंदी अनुवाद सहित ,The Pātimokkhasutta (Bhikkhupātimokkha) with Hindi translation

₹60

बौद्ध-सङ्घ के लिए बुद्ध के मूल शिक्षापदों का संग्रह 'पातिमोक्खसुत्त' नाम से किया गया है। इस सुत्त को भी भिक्षु और भिक्षुणियों के लिए पृथक पृथक दो भागों में विभक्त किया गया -    १. भिक्खुपातिमोक्ख एवं २. भिक्खुनिपातिमोक्ख। इस पुस्तक में 'भिक्खुपातिमोक्ख' पर विचार किया गया है।

सुत्तपिटके खुद्दकनिकाये बुद्धवंसपालि (हिंदी अनुवादसहित ), The Buddhavansapali (Khuddakanikayapali) with Hindi Translation

₹500

स्वयं भगवान गौतम बुद्ध के मुखारविन्द से प्रथम बुद्ध से प्रारंभ कर अट्ठाइसवें बुद्ध तक के सभी २८ अवतारों का वर्णन पालि परम्परा के अनुसार से हुआ है। इसमें सभी बुद्धावतारों के परिचय के साथ उनका अवतारकाल, आयु ,जन्म ,जाति ,जन्म-स्थान ,माता, पिता, विवाह ,गृहाभिनिस्क्रमण, दुष्करचर्या, बोधिवृक्ष , बुद्वत्वप्राप्ति, धर्मचक्रप्रवर्तन, अग्रश्रावक,अग्रश्राविका,उपस्थापक, अग्रउपासक,अग्रउपासिका,अभिसमय,सन्तसमागम एवं उनका निर्वाणकाल भी वर्णित है।

मज्झिमनिकायपालि -३ खण्डों में (१ मूलपण्णासकं २. मज्झिमपण्णासकमिता ३ . उपरिपण्णासकमिता ) हिन्दीअनुवाद सहित। The Majjhimanikayapali (3 volumes with Hindi Translation)

₹3,000

मज्झिमनिकायपालि का  बर्मा देश (म्यांमार) में हुए छट्ठ संगायन पर आधृत और श्रीलङ्का ,श्याम (थाईलैंड ) तथा पालि टैक्सट सोसाइटी लन्दन के संस्करणों का सहयोग लेकर सन १९५६ -६१ में ' पालि त्रिपिटक प्रकाशन मण्डल ' नालन्दा से प्रकाशित देवनागरी -संस्करण एवं आचार्य श्रीबुद्धघोष की अट्ठकथा का सहारा लेकर, स्वतंत्र रूप से किया गया हिंदी रूपान्तर।

मिलिन्दपञ्हपालि Milindapanha Pali ( Qustions of Milinda )

₹1,200

मिलिन्दपञ्हपालि में, पालि साहित्य के पालि -त्रिपिटक से नाना ग्रंथों के नाम देकर पाँच निकायों,  अभिधम्मपिटक के सात ग्रंथों और उनके भिन्न-भिन्न अंगों के निर्देशपूर्वक अनेक अंश उद्धृत किये गये हैं

महावग्गपालि ( मूल पालि एवं हिंदी अनुवाद सहित ) The Mahavaggapali ( Pali Text with Hindi Translation )

₹1,600

भगवान बुद्ध के प्रवचन काल (पैंतालीस वर्षों ) में उनका अमूल्य उपदेशसंग्रह विषय - विभाजन करते हुए, इसे तीन भागों में संग्रह किया गया । यह संग्रह त्रिपिटक कहलाया ये तीन पिटक हैं - १. विनय पिटक २.सुत्तपिटक ३.अभिधम्मपिटक

 

Buddha His Life, His Doctrine, His Order

₹595

Translated from the German by William Hoey.

Tibetan Healing Handbook

₹190

A Practical Manual for Diagnosing, Treating, and Healing with Natural Tibetan Medicine.

In Search of The Dharma

₹800

Memoirs of a Modern Chinese Buddhist Pilgrim. Edited with an Introduction by Chun-Fang Yu and Translated by Denis C. Mair.