Vijnana Bhairava or Divine Consciousness

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Vijnanabhairava is a very ancient book on yoga. It studiously eschews mechanical worship,external rites and ceremonies and goes directly to the heart of the problem of the union of humanconsciousness withthe Divine. There is no theoretical discussion in the Book.It describes112 types of yoga each of which is a precious gem delineating the mystic approach to the Divine. For this purpose, it makes full use of all the aspects of human life--pranamanas, imagination and intuition.

Wisdom of The Ancient Seers

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The Rig Veda is perhaps the oldest book in the world, dating back the dawn of history. It is the

Your Desitny & Scientific Hand Analysis

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In this book, the author analyses and discusses the relationship between the lines on the hand and their possible significance

जातकपारिजातः द्वितीय भाग

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ज्योतिष के संहिता, होरा और सिद्धांत- इन तीन विषयों में प्रस्तुत कृति का स्थान होरा के अंतर्गत है. इसका निर्माण सर्वार्थचिन्तामणिकार वेंकटाद्रि के पुत्र श्री वैद्यनाथ ने विक्रम सम्वत १४८२ में किया था. रचना मौलिक है किन्तुय इसमें श्रीपतिपद्धति, तरावली, सर्वार्थचिन्तामणि, बृहज्जातक तथा अन्य पूर्ववर्ती ग्रंथों का सार भी मिलता है. अठारह अध्यायों के इस विशाल ग्रन्थ को दो भागों में बाँट दिया गया है.

जातकपारिजातः प्रथम भाग

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ज्योतिष के संहिता, होरा और सिद्धांत- इन तीन विषयों में प्रस्तुत कृति का स्थान होरा के अंतर्गत है. इसका निर्माण सर्वार्थचिन्तामणिकार वेंकटाद्रि के पुत्र श्री वैद्यनाथ ने विक्रम सम्वत १४८२ में किया था. रचना मौलिक है किन्तुय इसमें श्रीपतिपद्धति, तरावली, सर्वार्थचिन्तामणि, बृहज्जातक तथा अन्य पूर्ववर्ती ग्रंथों का सार भी मिलता है. अठारह अध्यायों के इस विशाल ग्रन्थ को दो भागों में बाँट दिया गया है.

नंद -मौर्य युगीन भारत

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प्रस्तुत पुस्तक अंग्रेजी भाषा में लिखित "ऐज ऑफ़ दि नन्दाज एंड मौर्याज " का हिंदी रूपांतरण है. मूल पुस्तक के संपादक प्रसिद्ध इतिहासवेत्ता आचार्य श्री नीलकंठ शास्त्री है जिन्होंने संपादन-कार्य के साथ-साथ इस ग्रन्थ के पांच अध्याय भी लिखे है. अन्य अध्यायों की रचना में सर्वश्री हेमचन्द्रराय चौधरी, जितेन्द्रनाथ बनर्जी, उपेन्द्रनाथ घोषाल, प्रबोधचंद्र बाग्ची , सुनिटिकुमार चटर्जी, वी राघवन, निहाररंजन रॉय इन आचार्यों के योगदान मिलता है.