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मदनमोहन मालवीय का दर्शन

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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष पर प्रकाशित प्रस्तुत ग्रन्थ महामना पंडित मदनमोहन मालवीय के बहुआयामी व्यक्तित्व तथा वैचारिकी के समन्वित कलेवर में गुम्फित मालवीय-दर्शन के सुधि अध्येता एवं साधक प्रोफ. डॉ देवव्रत चौबे के प्रेरणास्पद तथा गंभीर व्याख्यानों का अभूतपूर्व संग्रह है.

नंद -मौर्य युगीन भारत

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प्रस्तुत पुस्तक अंग्रेजी भाषा में लिखित "ऐज ऑफ़ दि नन्दाज एंड मौर्याज " का हिंदी रूपांतरण है. मूल पुस्तक के संपादक प्रसिद्ध इतिहासवेत्ता आचार्य श्री नीलकंठ शास्त्री है जिन्होंने संपादन-कार्य के साथ-साथ इस ग्रन्थ के पांच अध्याय भी लिखे है. अन्य अध्यायों की रचना में सर्वश्री हेमचन्द्रराय चौधरी, जितेन्द्रनाथ बनर्जी, उपेन्द्रनाथ घोषाल, प्रबोधचंद्र बाग्ची , सुनिटिकुमार चटर्जी, वी राघवन, निहाररंजन रॉय इन आचार्यों के योगदान मिलता है.

Age of The Nandas & Mauryas

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The age of the Nandas and Mauryas (c. 400-185 B.C.) witnessed great changes sweeping over the face of Western Asia, over lands with which India had much to do from the dawn of history, and account must be taken of their effects, direct and indirect, on the political, economic and artistic life of India. In this seminal period when Indo-Aryan civilization may be said to have attained its maturity, India did not hesitate to borrow political and economic plans and artistic motifs from abroad, and put them to the most appropriate uses in her own institutions and monuments.

विज्ञान भैरव (Sanskrit-Hindi)

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विज्ञान भैरव तंत्रसाधना का अद्वितीय ग्रन्थ है जिसकी व्याख्या आचार्य द्विवेदी जी ने की इस पुस्तक में योग तंत्र एवं साधना का अद्वितीय संगम है तथा उसके सही अर्थ की व्याख्या है. 'इस ग्रन्थ में आचार्य श्री कहते है- "विज्ञानभैरव प्रश्न-प्रतिवचनात्मक शैली में लिखा गया एक अगम ग्रन्थ है. प्रश्न देवी अथवा भैरवी करती है और उसके उत्तर भगवन भैरव देते हैं.

श्री श्री परात्रिंशिका

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'श्री श्री पारात्रिंशिका' मूलरूप से कश्मीर के अद्वैत त्रिक्दर्शन के मुख्या तंत्रग्रंथ 'श्रीरुद्रयामलतन्त्र' से उद्धृत ३५ श्लोकों का एक छोटा संग्रह है. यह संग्रह पश्यन्ति भूमिका पर उत्तर कर अपने ही बहिर्मुखीन शकताप्रसार का रहस्य समझने की कामना से शिष्य के रूप में प्रस्ता पूछने वाली भगवती परभैरवी 'पराभट्टारिका' और पराभव पर ही अवस्थित रहकर गुरु के रुऊप में उसके प्रश्न का समाधान प्रस्तुत करने वाले उत्तरदाता 'परभैरव' का पारस्परिक संवाद है. यह एक बृहत्काय शारदा मूल-पुस्ति है जिसका अंतिम भाग श्री पारात्रिंशिका है. पूर्व भाग आचार्य अभिनव द्वारा रचित 'श्री तंत्रसार' तंत्रग्रंथ है.

शिवयोगीशिवाचार्यविरचितः श्रीसिद्धान्तशिखामणिः

600

Srisiddhantasikhamanih of Sivayogi Sivacarya with Tattvapradipika Sanskrta Commentary By Sri Maritontadarya & Jnanavati Hindi commentary by Dr. Radheshyam Chaturvedi.

Paramesvaragamah

700

In the history of Tantric literature, ten Saivagamas and eighteen Rudragamas have been recognised. Pauskar Agama maintains that all the

मुद्राराक्षसं

Mudrarakshasam by Mahakavi Vishakhdutt. Edited with commentary by Dr. Ramashankar Tripathi.

वैदिक संस्कृति

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भारतीय परंपरा में वेद को अनादि अथवा ईश्वरीय मन गया है. इतिहास और संस्कृति के विद्यार्थी के लिए इनमें भारतीय