Gautam Chatterjee
Sri Tantralokah by Abhinavagupta (6 Vols.)
Agamas in Indian Dramatics and Musicology
Jnanaganja by Gopinath Kaviraj
संगीत विमर्श
पुस्तक के पच्चीस अध्यायों को पच्चीस शोध के रूप में देखा जा सकता है. संगीत के प्राचीन और मह्त्त्वपूर्ण आकर ग्रंथों पर आगम के प्रभाव पर कभी गहन शोध नहीं हुआ, न ही इस ढंग से विस्तृत विचार हुआ की संगीत और आगम में परस्पर अतयंतिक सम्बन्ध है, या की इन परस्पर विमर्श आरम्भ हो. दो एक पुस्तकों में संक्षेप में इस पर चर्चा जरूर है.