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सुत्तपिटके खुद्दकनिकाये सुत्तनिपातपालि (हिन्दी-अनुवाद सहित ), The Suttanipatapali (khuddakanikayapali) with Hindi Translation.

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बौद्धधर्म की परम्परा में सुत्तनिपातपालि उतना ही लोकप्रिय माना गया है जितना धम्मपदपालि ; मौलिक बौद्ध धर्म एवं बौद्ध साहित्य की दृष्टि से इस ग्रन्थरत्न का बुद्धकाल से ही उच्चतम स्थान माना जाता है।
सम्राट अशोक ने अपने भब्रुशिला लेख (बैराठ,जयपुर,राजस्थान ) में बुद्धोपदिष्ट जिन महत्वशाली सात सूत्रों का भिक्षुओं के लिये अनिवार्यरूप से प्रतिदिन स्वाध्याय घोषित किया है उन में से तीन प्रमुख सूत्र सुत्तनिपात ग्रन्थ से ही लिये गये हैं।

महायानसूत्रालङ्कार: (आर्यमैत्रेयविरचितःअनेकविधसूची-पाठान्तरादिसंवलितः विज्ञानवादस्य प्रमुखो ग्रन्थः),Mahayanasutralankar by Aryamaitreya & Asanga

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' महायानसूत्रालङ्कार ' विज्ञानवाद का सबसे प्रधान ग्रन्थ है। ' महायानसूत्रालङ्कार ' गुरु मैत्रयनाथ एवम उनके शिष्य आर्य असङ्गकी सम्मिलित कृति है। मूलभाग मैत्रेयनाथ का और टीकाभाग आर्य असङ्ग का कहा जाता है।

गुह्यसमाजतन्त्रम तथागतगुह्यकम (हिन्दी अनुवाद सहित ), GuhyaSamajTantra or Tathagataguhyaka

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तत्कालीन बौद्ध धर्मानुयायी मूल बौद्ध धर्म से संतुष्ट नहीं थे। वे बुद्धत्वप्राप्ति की एक ऐसी सरलतम चामत्कारिक निश्चित प्रक्रिया चाहते थे जिसके द्वारा इसी जीवन में या उससे भी पूर्व ही निर्वाण प्राप्त किया जा सके। गुह्यसमाज ग्रन्थ ने उनकी इस आकांक्षा को पूर्णतः संतुष्ट किया. इसी कारण यहाँ ग्रन्थ, अत्यधिक लोकप्रिय हुआ।

सुत्तपिटके खुद्दकनिकाये धम्मपदपालि (हिन्दी-संस्कृत अनुवाद सहित) , The Dhammapadapali with Hindi & Sanskrit Translation.

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धम्मपद ग्रन्थ का बौद्धों के हृदय में वही आदर, श्रद्धा तथा पूजा का भाव है जो किसी हिन्दू का वेद या गीता के प्रति तथा किसी ईसा-मतावलम्बी का बाइविल के प्रति, या किसी पारसी का अवेस्ता के प्रति होता है। विद्वानों में धम्मपद ग्रन्थ का साहित्यिक एवं धार्मिक,दोनों ही स्तरों पर समान महत्व माना गया है।

सुत्तपिटके खुद्दकनिकाये बुद्धवंसपालि (हिंदी अनुवादसहित ), The Buddhavansapali (Khuddakanikayapali) with Hindi Translation

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स्वयं भगवान गौतम बुद्ध के मुखारविन्द से प्रथम बुद्ध से प्रारंभ कर अट्ठाइसवें बुद्ध तक के सभी २८ अवतारों का वर्णन पालि परम्परा के अनुसार से हुआ है। इसमें सभी बुद्धावतारों के परिचय के साथ उनका अवतारकाल, आयु ,जन्म ,जाति ,जन्म-स्थान ,माता, पिता, विवाह ,गृहाभिनिस्क्रमण, दुष्करचर्या, बोधिवृक्ष , बुद्वत्वप्राप्ति, धर्मचक्रप्रवर्तन, अग्रश्रावक,अग्रश्राविका,उपस्थापक, अग्रउपासक,अग्रउपासिका,अभिसमय,सन्तसमागम एवं उनका निर्वाणकाल भी वर्णित है।

पालिव्याकरण (बालावतार) (हिन्दी अनुवाद सहित ), Pali Grammar (Balavatara) of Bhikkhu Dharmakitti with Hindi Translation

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पालि में लिखे गये जितने भी व्याकरण ग्रन्थ हैं, वे तीन परम्पराओं में विभक्त हैं। ये परम्पराएँ पालि-व्याकरणों के पठन-पाठन की अपनी परम्पराएँ हैं। ये परम्पराएँ हैं : १. कच्चान, २. मोग्गल्लान और ३.सद्द्नीति।
इसी कच्चान परंपरा के अन्तर्गत "बालावतार" है। "बालावतार" प्रारम्भिक पाठकों के लिए बहुत ही उपयोगी और महत्वपूर्ण ग्रन्थ है।

पातिमोक्खसुत्त (भिक्खुपातिमोक्ख) हिंदी अनुवाद सहित ,The Pātimokkhasutta (Bhikkhupātimokkha) with Hindi translation

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बौद्ध-सङ्घ के लिए बुद्ध के मूल शिक्षापदों का संग्रह 'पातिमोक्खसुत्त' नाम से किया गया है। इस सुत्त को भी भिक्षु और भिक्षुणियों के लिए पृथक पृथक दो भागों में विभक्त किया गया -    १. भिक्खुपातिमोक्ख एवं २. भिक्खुनिपातिमोक्ख। इस पुस्तक में 'भिक्खुपातिमोक्ख' पर विचार किया गया है।