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विनयपिटके चुल्लवग्गपालि (हिन्दी अनुवाद सहित), The Chullavaggapali with Hindi Translation

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विनयपिटक का यह महत्वपूर्ण चुल्लवग्गपालि ग्रन्थ १२ खन्धकों (अध्यायों ) में विभक्त है । इन में, आदि के दश खन्धकों में, भगवान बुद्ध द्वारा भिक्षुओं को उपदिष्ट विनय (अनुशासन ) का वर्णन है।
शेष दो (११ एवं १२) में समय समय पर त्रिपिटक की प्रामाणिकता के हेतु भिक्षुओं द्वारा की गयी दो सङ्गीतियों (त्रिपिटक का अक्षरशः मूलपाठ निर्धारण ) का वर्णन है।

वैदिक संस्कृति

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भारतीय परंपरा में वेद को अनादि अथवा ईश्वरीय मन गया है. इतिहास और संस्कृति के विद्यार्थी के लिए इनमें भारतीय

वैरागी

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नारी अन्तर्मन पर आधारित आध्यात्मिक कथा प्रसंग।

शिव-संबोध और गंगा-प्रतीक

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रचनाकार ने शिव को एक ‘अद्भुत देवता’ के रूप में प्रस्तुत किया है. दूर से लगता है कोई देव-पुरुष है,

शिवयोगीशिवाचार्यविरचितः श्रीसिद्धान्तशिखामणिः

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Srisiddhantasikhamanih of Sivayogi Sivacarya with Tattvapradipika Sanskrta Commentary By Sri Maritontadarya & Jnanavati Hindi commentary by Dr. Radheshyam Chaturvedi.