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पातिमोक्खसुत्त (भिक्खुपातिमोक्ख) हिंदी अनुवाद सहित ,The Pātimokkhasutta (Bhikkhupātimokkha) with Hindi translation

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बौद्ध-सङ्घ के लिए बुद्ध के मूल शिक्षापदों का संग्रह 'पातिमोक्खसुत्त' नाम से किया गया है। इस सुत्त को भी भिक्षु और भिक्षुणियों के लिए पृथक पृथक दो भागों में विभक्त किया गया -    १. भिक्खुपातिमोक्ख एवं २. भिक्खुनिपातिमोक्ख। इस पुस्तक में 'भिक्खुपातिमोक्ख' पर विचार किया गया है।

पालिव्याकरण (बालावतार) (हिन्दी अनुवाद सहित ), Pali Grammar (Balavatara) of Bhikkhu Dharmakitti with Hindi Translation

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पालि में लिखे गये जितने भी व्याकरण ग्रन्थ हैं, वे तीन परम्पराओं में विभक्त हैं। ये परम्पराएँ पालि-व्याकरणों के पठन-पाठन की अपनी परम्पराएँ हैं। ये परम्पराएँ हैं : १. कच्चान, २. मोग्गल्लान और ३.सद्द्नीति।
इसी कच्चान परंपरा के अन्तर्गत "बालावतार" है। "बालावतार" प्रारम्भिक पाठकों के लिए बहुत ही उपयोगी और महत्वपूर्ण ग्रन्थ है।

पाश्चात्य नृत्य कला

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पूर्वी देशों की भांति पश्चिमी देशों की भी एक सुसमृद्ध नृत्य परंपरा  है. नित नव रूप  बॉलरूम डांसेज  के  अतिरिक्त

भरतनाट्यम शिक्षा (प्रथम भाग)

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इस पुस्तक की रचना भातखण्डे संगीत विद्यापीठ, लखनऊ, गन्धर्व महाविद्यालय मंडल, मिराज एवं इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ की प्रवेशिका, प्रथम एवं मध्यमा प्रयाग संगीत समिति, इलाहबाद की जूनियर व सीनियर डिप्लोमा प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ की नृत्य भूषण तथा उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश बोर्ड की हाई स्कूल व इंटरमीडिएट के भरतनाट्यम के पाठ्यक्रम के अनुसार की गयी है. विभिन्न विश्वविद्यालयों के बी ए (नृत्य) के पाठ्यक्रमों के लिए भी यह समान रूप से उपयोगी है.