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मरणोत्तर जीवन का रहस्य

350

पारलौकिक जगत से सम्बंधित अनुभवपूर्ण मौलिक एक अदभुत शोध ग्रन्थ।

महाकविकालिदासविरचितं रघुवंशम

400

Raghuvamsam of Kalidasa 'Sanjivini" Commentary of Mallinatha and 'Chandrakala' Hindi Commentary by Dr. Shrikrishanamani Tripathi.

मारणपात्र

600

योग तंत्र के गूढ़ गोपनीय एवं रहस्यमय आध्यात्मिक विषयों के मर्मज्ञ, प्रच्छन्न अप्रच्छन्न, सिद्ध, साधक योगी, संत, महात्माओं के सत्संग का परिणाम।

मीमांसातर्कभाषा

395

This book, Mimamsatarkabhasa, is a great leap in the advancement of Mimamsa. Along with Mimamsanaya-bhusanam, and Mimamsapadarthavijnanam, the trio of Mimamsa books composed by Prof. Nyaupane is undeniably the greatest work in Mimamsa this century has seen. He has previously composed and or translatd more than 30 books, such as, Kalachakratantram, Guhyasamajatantram, Hevajra-tantram, Lahidi Kriyayog Samhita, Bauddhadarsanabhumi, Bauddhapramanasastram, Tarinivarivasya, Darsanasandoha and so on.

मृत्यु की दस्तक

300

जीवात्मा के लिए सबसे बारे सत्य है मृत्यु. जीवन में केवल मृत्यु ही अवश्यम्भावी है क्योंकि यही एक स्थिति है जो जोगी और भोगी, राजा और रैंक, शाशक और शाषित - किसी भी वर्ग में भेदभाव नहीं रखती. अलग-अलग धर्मों और दर्शनों ने अपने ही दृष्टिकोण से इसकी व्याख्या की है.

मेरा ईश्वर लाभ

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यह एक परमार्थ की उपलब्ध चैतन्ययोगी की आत्मकथा है. जिसने अपने जीवन को चैतन्य की प्राप्ति हेतु उत्सर्ग कर दिया.

योगिनीहृदयम

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योगिनीह्रदयम भगवती त्रिपुरसुन्दरी की अंतर वरिवस्या का प्रतिपादक ग्रन्थ है. इसमें तीन पटल हैं: चक्रसंकेत, मन्त्रसङ्केत और पूजासंकेत. प्रथम पटल में भगवती के अवतार-स्थान श्रीचक्र का आध्यात्मिक स्वरुप प्रदर्शित किया गया है की किस प्रकार विसटीर्ना तत्त्व विश्वमय बन जाता है. शक्ति के अम्बिकादि तथा शान्तादि चार प्रकारों, वाणी के पारा आदि चार भेड़ों, चार पीठों, चार लिंगों, संख्या-सम्मत २५ तत्त्वों तथा समस्त