Showing 25–27 of 27 results
बौद्ध धर्म में जनसाधारण के लिए जिस नीतिविधान का आदर्श रखा गया है उसी का दिग्दर्शन ये दोनों ग्रन्थ करते हैं जिनको बौद्ध धर्म में सद्गृहस्थों के लिये आदरणीय एवं ग्राह्य मन गया है।
दीघनिकाय ग्रन्थ में बुद्धाभिमत दर्शन के साथ यथाप्रसङ्ग तत्कालीन इतिहास, भूगोल,राजनीति एवं सामाजिक व्यवस्था भी भगवान बुद्ध के प्रवचनों में ओतप्रोत है।
संयुक्तनिकाय भगवान् बुद्ध के उपदिष्ट सूत्रों के संग्रह है। समस्त सुत्तपिटक में दार्शनिक दृष्टि से संयुक्तनिकाय का स्थान बहुत महत्वपूर्ण है।
Username or email address *Required
Password *Required
Log in
Lost your password? Remember me
Or login with
No account yet?