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भगवती काली ही कंकाल मालिनी हैं. कंकाल मालिनी का अर्थ ‘मुण्डमालिनी काली’ है. इस ग्रंथ के आद्यंत पाठ करने पर
निलादेवी दसमहा विद्याओं में अन्यतम द्वितीय महाविद्या तारा देवी का ही रूपभेद मात्रा हैं. प्रत्येक महाविद्या ही एक अखण्ड महाविद्या
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