Tantra
काश्मीर शिवाद्वयवाद की मूल अवधारणाएं
आगमिक संस्कृति के सारभूत काश्मीर शिवाद्वयवादी जीवन-दर्शन के प्रति विद्यानों की अनुदिन बढ़ती हुई प्रवृत्ति के बावजूद इस सम्प्रदाय की दार्शनिक, पद्यात्मक/अवधानात्मक और अनुष्ठानात्मक संरचना पर अब तक जो काम हुआ है वह बहुमूल्य होने पर भी अत्यल्प है. इस सन्दर्भा में गंभीर गवेषणा को आगे बढ़ाने के क्रम में यह ग्रन्थ एक प्रारंभिक प्रयास है जिसमें कश्मीर शिवाद्वयवाद के मौलिक चिंतनक्रम में अनुस्यूत आधारभूत विशिष्टा प्रत्ययों को रूपायित कर उनके उन्मीलन से इस सम्प्रदाय में एक अंतर्दृष्टि विक्सित करने की चेष्टा की गयी है.
चन्द्रज्ञानागमः (क्रिया-चर्यापादौ) भाषानुवाद -टिप्पणीसहितः
ज्ञानार्णवतंत्रम
ज्ञानार्णव तंत्र का प्रस्तुत संस्करण श्रीविद्या के उपासकों के समक्ष इदं प्रथमतया हिंदी के साथ प्रस्तुत है. प्रस्तुत संस्करण का मूल आनंदाश्रम के मुद्रित मूल पर आधारित है तथा अनेक स्थानों पर पाठों को मंत्रमहोदधि अदि अन्य ग्रंथों से मिलकर शुद्ध किया गया है. श्रीविद-विषयक अनेक ग्रन्थ सम्प्रदायानुसार प्राप्त होते हैं. इनके एक विवेचन आवश्यक है.
नारद पंचरात्र
योगिनीहृदयम
योगिनीह्रदयम भगवती त्रिपुरसुन्दरी की अंतर वरिवस्या का प्रतिपादक ग्रन्थ है. इसमें तीन पटल हैं: चक्रसंकेत, मन्त्रसङ्केत और पूजासंकेत. प्रथम पटल में भगवती के अवतार-स्थान श्रीचक्र का आध्यात्मिक स्वरुप प्रदर्शित किया गया है की किस प्रकार विसटीर्ना तत्त्व विश्वमय बन जाता है. शक्ति के अम्बिकादि तथा शान्तादि चार प्रकारों, वाणी के पारा आदि चार भेड़ों, चार पीठों, चार लिंगों, संख्या-सम्मत २५ तत्त्वों तथा समस्त
रुद्रयामलम उत्तरतन्त्रम
लिंगधारण चन्द्रिका
विज्ञान भैरव (Sanskrit-Hindi)
विज्ञान भैरव तंत्रसाधना का अद्वितीय ग्रन्थ है जिसकी व्याख्या आचार्य द्विवेदी जी ने की इस पुस्तक में योग तंत्र एवं साधना का अद्वितीय संगम है तथा उसके सही अर्थ की व्याख्या है. 'इस ग्रन्थ में आचार्य श्री कहते है- "विज्ञानभैरव प्रश्न-प्रतिवचनात्मक शैली में लिखा गया एक अगम ग्रन्थ है. प्रश्न देवी अथवा भैरवी करती है और उसके उत्तर भगवन भैरव देते हैं.