Tantra
Shrividya Varivasya (Sanskrit)
Mahanirvana Tantram
ज्ञानार्णवतंत्रम
ज्ञानार्णव तंत्र का प्रस्तुत संस्करण श्रीविद्या के उपासकों के समक्ष इदं प्रथमतया हिंदी के साथ प्रस्तुत है. प्रस्तुत संस्करण का मूल आनंदाश्रम के मुद्रित मूल पर आधारित है तथा अनेक स्थानों पर पाठों को मंत्रमहोदधि अदि अन्य ग्रंथों से मिलकर शुद्ध किया गया है. श्रीविद-विषयक अनेक ग्रन्थ सम्प्रदायानुसार प्राप्त होते हैं. इनके एक विवेचन आवश्यक है.
विज्ञान भैरव (Sanskrit-Hindi)
विज्ञान भैरव तंत्रसाधना का अद्वितीय ग्रन्थ है जिसकी व्याख्या आचार्य द्विवेदी जी ने की इस पुस्तक में योग तंत्र एवं साधना का अद्वितीय संगम है तथा उसके सही अर्थ की व्याख्या है. 'इस ग्रन्थ में आचार्य श्री कहते है- "विज्ञानभैरव प्रश्न-प्रतिवचनात्मक शैली में लिखा गया एक अगम ग्रन्थ है. प्रश्न देवी अथवा भैरवी करती है और उसके उत्तर भगवन भैरव देते हैं.
योगिनीहृदयम
योगिनीह्रदयम भगवती त्रिपुरसुन्दरी की अंतर वरिवस्या का प्रतिपादक ग्रन्थ है. इसमें तीन पटल हैं: चक्रसंकेत, मन्त्रसङ्केत और पूजासंकेत. प्रथम पटल में भगवती के अवतार-स्थान श्रीचक्र का आध्यात्मिक स्वरुप प्रदर्शित किया गया है की किस प्रकार विसटीर्ना तत्त्व विश्वमय बन जाता है. शक्ति के अम्बिकादि तथा शान्तादि चार प्रकारों, वाणी के पारा आदि चार भेड़ों, चार पीठों, चार लिंगों, संख्या-सम्मत २५ तत्त्वों तथा समस्त
Shakti Shiva and Yoga
Vijnana Bhairava or Divine Consciousness
Vijnanabhairava is a very ancient book on yoga. It studiously eschews mechanical worship,external rites and ceremonies and goes directly to the heart of the problem of the union of humanconsciousness withthe Divine. There is no theoretical discussion in the Book.It describes112 types of yoga each of which is a precious gem delineating the mystic approach to the Divine. For this purpose, it makes full use of all the aspects of human life--prana, manas, imagination and intuition.