श्री श्री परात्रिंशिका

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'श्री श्री पारात्रिंशिका' मूलरूप से कश्मीर के अद्वैत त्रिक्दर्शन के मुख्या तंत्रग्रंथ 'श्रीरुद्रयामलतन्त्र' से उद्धृत ३५ श्लोकों का एक छोटा संग्रह है. यह संग्रह पश्यन्ति भूमिका पर उत्तर कर अपने ही बहिर्मुखीन शकताप्रसार का रहस्य समझने की कामना से शिष्य के रूप में प्रस्ता पूछने वाली भगवती परभैरवी 'पराभट्टारिका' और पराभव पर ही अवस्थित रहकर गुरु के रुऊप में उसके प्रश्न का समाधान प्रस्तुत करने वाले उत्तरदाता 'परभैरव' का पारस्परिक संवाद है. यह एक बृहत्काय शारदा मूल-पुस्ति है जिसका अंतिम भाग श्री पारात्रिंशिका है. पूर्व भाग आचार्य अभिनव द्वारा रचित 'श्री तंत्रसार' तंत्रग्रंथ है.