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श्रीविष्णुशर्मविरचितम पञ्चतन्त्रम

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Sri Visnu Sarma's Pancatantram with the Sanskrit commentary Abhinavarajalaxmi by Pt. Guru Prasad Shastri and Hindi commentary by Acharya Shri Sitaram Shastri. Edited by Prof. Bal Shastri.

संगीत विमर्श

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पुस्तक के पच्चीस अध्यायों को पच्चीस शोध के रूप में देखा जा सकता है. संगीत के प्राचीन और मह्त्त्वपूर्ण आकर ग्रंथों पर आगम के प्रभाव पर कभी गहन शोध नहीं हुआ, न ही इस ढंग से विस्तृत विचार हुआ की संगीत और आगम में परस्पर अतयंतिक सम्बन्ध है, या की इन परस्पर विमर्श आरम्भ हो. दो एक पुस्तकों में संक्षेप में इस पर चर्चा जरूर है.

संस्कृत-व्याकरण एवं लघुसिद्धान्तकौमुदी

275

संस्कृत-व्याकरण का संशोधित एवं परिवर्धित पंचम संस्करण पाठकों के हाथों में देते हुए हरदिन प्रसन्नता हो रही है. संपूर्ण भारत

सांख्यतत्त्वकौमुदि

195

(ईश्वरकृष्ण-कृत सांख्यकारीका तथा वाचस्पतिमिश्र -कृत तत्त्वकौमुदी का हिन्दी -अनुवाद एवं ज्योतिष्मती व्याख्या)

सिद्धान्तप्रकाशिका सर्वात्मशंभुना विरचिता भाषानुवाद-टिप्पणीसहिता

100

श्री सर्वात्मसम्भु इस ग्रन्थ के रचयिता हैं. संपादक के विचार से सर्वात्मासीवा और सर्वात्मसम्भु में कोई  भेद नहीं है. दोनों

हंस : काशी अंक

500

Hansa : Kashi Anka Edited by Premchand

First Edition: October-November 1933

First VVP Edition : 2022

हिन्दी मंत्रमहार्णव (देवता खंड)

600

इस मंत्रशास्त्र के ही प्रभाव से प्राचीनकाल में मनुष्य न केवन देवताओं पर विजय प्राप्त करने में सफल होता था,

हिन्दी मंत्रमहार्णव (देवी खण्ड )

1,050

मंत्रशास्त्र की प्रत्येक पुस्तक में लिखा है की पुस्तक में लिखा मंत्र निष्प्रभावी होता है क्योंकि प्रत्येक मंत्र को जागृत