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कथक नृत्य शिक्षा (द्वितीय भाग)

500

इस पुस्तक की रचना भातखण्डे संगीत विद्यापीठ लखनऊ, गन्धर्व महाविद्यालय मंडल - मिरज , एवं प्राचीन कला केंद्र - चंडीगढ़ की विशारद, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय - खैरागढ़ की विद , प्रयाग संगीत समिति - इलाहाबाद की प्रभाकर, राजा मानसिंघ तोमर विश्वविद्यालय - ग्वालियर की विद व संगीत कला रत्न तथा उज्जैन, इंदौर, भोपाल, बड़ौदा, वाराणसी, चंडीगढ़, पटिआला, अमृतसर आदि विश्वविद्यालय की बी.ए परीक्षा के कत्थक नृत्य विषय के पाठ्यक्रमों का सामंजस्य कर की गयी है. स्नातक स्टार के समस्त पाठ्यक्रमों के लिए तो यह पुस्तक समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी ही स्नातकोत्तर स्टार के विद्यार्थियों का भी इससे समुचित लाभ होगा.

भारतीय संगीत का इतिहास

450

प्रस्तुत ग्रन्थ भारतीय संगीत का इतिहास अपने आप में असाधारण शोध-ग्रन्थ है. इसके लेखक डॉक्टर ठाकुर जयदेव सिंह बहु-आयामी व्यक्तित्व के विद्वान् थे. संगीतशास्त्र की सुविख्यात विदुषी प्रोफ. प्रेमलता शर्मा द्वारा सम्पादित इस ग्रन्थ को कोलकाता की संगीत रिसर्च अकादमी ने सन `१९९४ ईस्वी में संगीत परिदर्शिनी ग्रंथमाला के प्रथम पुष्प के रूप में प्रकाशित किया था. भारतीय संगीत क्षेत्र का अपने ढंग का पहला अनूठा ग्रन्थ है.

कथक नृत्य शिक्षा (प्रथम भाग)

300

इस पुस्तक की रचना भातखण्डे संगीत विद्यापीठ, लखनऊ, गांधर्व महाविद्यालय मंडल, मिरज इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ तथा राजा मानसिंह तोमर विश्विद्यालय, ग्वालियर की प्रथम एवं मध्यमा प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद की जूनियर व सीनियर डिप्लोमा प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ की नृत्य भूषण तथा उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश बोर्ड की हाई स्कूल व इंटरमीडिएट के कत्थक नृत्य के पाठ्यक्रम के अनुसार की गयी है. विभिन्न विश्वविद्यालयों के बी. ए (नृत्य) के पाठ्यक्रमों के लिए भी यह सामान रूप से उपयोगी है.

Tantra Mantra Yantra in Dance

900

The Indian perspective has always been holistic and all-inclusive : thought and activity in different fields, at different levels, have been interlinked to produce what has been timeless. Indian arts is a classic example of such amalgamation : it interlinks aspects of art, philosophy, mythology, religion, and mysticism. This book is an attempt to unravel such links with specific reference to the Kathaka dance form.

श्रीनीलतन्त्रम

150

निलादेवी दसमहा विद्याओं में अन्यतम द्वितीय महाविद्या तारा देवी का ही रूपभेद मात्रा हैं. प्रत्येक महाविद्या ही एक अखण्ड महाविद्या

कंकालमालिनीतंत्रम

100

भगवती काली ही कंकाल मालिनी हैं. कंकाल मालिनी का अर्थ ‘मुण्डमालिनी काली’ है. इस ग्रंथ के आद्यंत पाठ करने पर

रुद्रयामलम उत्तरतन्त्रम

600

'रुद्रयामल उत्तरतंत्र: सिद्धांत, साधना एवं रहस्य' कई दृष्टिकोण से अनूठी कृति है. तंत्र जैसे गुह्य विषय पर भ्रान्ति और पाखंड का निराकरण करते हुए विज्ञानं सम्मत प्रमाणिकता का उद्घोष इस पुस्तक की सबसे बरी विशेषता है.

On the Meaning of the Mahabharata

295

Mahabharata-the great epic is a source of perennial inspiration for the masses of India. The present volume is a collection

योगिनीहृदयम

295

योगिनीह्रदयम भगवती त्रिपुरसुन्दरी की अंतर वरिवस्या का प्रतिपादक ग्रन्थ है. इसमें तीन पटल हैं: चक्रसंकेत, मन्त्रसङ्केत और पूजासंकेत. प्रथम पटल में भगवती के अवतार-स्थान श्रीचक्र का आध्यात्मिक स्वरुप प्रदर्शित किया गया है की किस प्रकार विसटीर्ना तत्त्व विश्वमय बन जाता है. शक्ति के अम्बिकादि तथा शान्तादि चार प्रकारों, वाणी के पारा आदि चार भेड़ों, चार पीठों, चार लिंगों, संख्या-सम्मत २५ तत्त्वों तथा समस्त